भारत का संविधान

"हम भारतवासी,गंभीरतापूर्वक यह निश्चय करके कि भारत को सार्वभौमिक,लोकतांत्रिक गणतंत्र बनाना है तथा अपने नागरिकों के लिए------- न्याय--सामाजिक,आर्थिक,तथा राजनैतिक ; स्वतन्त्रता--विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास,आस्था,पूजा पद्दति अपनाने की; समानता--स्थिति व अवसर की व इसको सबमें बढ़ाने की; बंधुत्व--व्यक्ति की गरिमा एवं देश की एकता का आश्वासन देने वाला ; सुरक्षित करने के उद्देश्य से आज २६ नवम्बर १९४९ को संविधान-सभा में,इस संविधान को अंगीकृत ,पारित तथा स्वयम को प्रदत्त करते हैं ।"

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मंगलवार, 4 नवंबर 2008

दूसरों के लिए जाने या अनजाने जब हम परेशानी का सबब बनते हैं.....तब ये ख़याल भी हमें नहीं आता कि दरअसल ये हम अपने ऊपर लौटा रहे हैं और जब वो सचमुच हमपर वापस लौटती हैं तब हमारे मुंह से उनके लिए गाली निकल जाती है ....मगर हमें ख्याल भी नही आता कि.....बाकि हर तरफ़ भागते दौड़ते रास्ते....हर तरफ़ आदमी का शिकार आदमी.....!!
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1 टिप्पणी:

jayaka ने कहा…

Aapane bade pate ki baat kahi hai Bhootnathji!.....doosaron ka khayaal to hume rakhna hi chaahiye!

 
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