भारत का संविधान

"हम भारतवासी,गंभीरतापूर्वक यह निश्चय करके कि भारत को सार्वभौमिक,लोकतांत्रिक गणतंत्र बनाना है तथा अपने नागरिकों के लिए------- न्याय--सामाजिक,आर्थिक,तथा राजनैतिक ; स्वतन्त्रता--विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास,आस्था,पूजा पद्दति अपनाने की; समानता--स्थिति व अवसर की व इसको सबमें बढ़ाने की; बंधुत्व--व्यक्ति की गरिमा एवं देश की एकता का आश्वासन देने वाला ; सुरक्षित करने के उद्देश्य से आज २६ नवम्बर १९४९ को संविधान-सभा में,इस संविधान को अंगीकृत ,पारित तथा स्वयम को प्रदत्त करते हैं ।"

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आने वाला........!!

सोमवार, 3 नवंबर 2008

तकते-तकते......राह......
आँख थक गई होगी....
रूह जिस्म से निकल कर....
कहीं और चली गई होगी.....
आने वाले के कदम.....
किसी और दिशा में......
मुड़ गए होंगे.....
रात भी थक कर....
सो गई होगी.....
सुबह किसी बच्चे-सी निकल,
मचल गई होगी.....
आने वाला कुछ सोचता होगा....
सबा बहकती हुई-सी......
कानों में कुछ कहती-सी होगी....
जिस्म से इक......
धुंआ-सा निकलता होगा....
सोच में कुछ पिघलता....
हुआ-सा होगा....
आने वाला आता ही होगा....
साँस भी थम-सी गई होगी...
आने वाला बस.....
अभी ही आने को है......
दिल की हर धड़कन...
सुबक कर रह गई होगी....
आने वाला..........बस...
आया ही आया.....
मगर....ऐ दिल....
आने वाले को गर....
आना ही होता...
तो अब तक......
आ ही ना जाता...!!
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1 टिप्पणी:

Capricornearth ने कहा…

waise aapne apna naam bhoothnath kyun rakha hai?
ya shaayad maine bekaar hi poocha
naame me rakha kya hai?
kuch akhshar hi hai to mode hue
kai riston ko jode hue

 
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