भारत का संविधान

"हम भारतवासी,गंभीरतापूर्वक यह निश्चय करके कि भारत को सार्वभौमिक,लोकतांत्रिक गणतंत्र बनाना है तथा अपने नागरिकों के लिए------- न्याय--सामाजिक,आर्थिक,तथा राजनैतिक ; स्वतन्त्रता--विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास,आस्था,पूजा पद्दति अपनाने की; समानता--स्थिति व अवसर की व इसको सबमें बढ़ाने की; बंधुत्व--व्यक्ति की गरिमा एवं देश की एकता का आश्वासन देने वाला ; सुरक्षित करने के उद्देश्य से आज २६ नवम्बर १९४९ को संविधान-सभा में,इस संविधान को अंगीकृत ,पारित तथा स्वयम को प्रदत्त करते हैं ।"

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प्यारे पी.एम् साहेब....!!

रविवार, 30 नवंबर 2008


प्यारे प्रधानमंत्री जी,
आपको इस देश के तमाम लोगों का राम-राम ,
आशा है सकुशल और सानंदित होंगे.....वैसे तो हम सब आम लोग आप लोगों की खुशियों के लिए भगवन से प्रार्थना करते हैं...मगर ना भी करें तो आप लोगों को क्या फर्क पड़ता है... (गलती से भगवान् लिख दिया है..आप अपनी सुविधानुसार खुदा..गाड...वाहे गुरु,जो भी चाहे कर लें...क्या करें हम हिंदू तो सम्प्रायवादी हैं...साले हम आज तलक भी आते-जाते लोगों को राम-राम ही करते चल रहे हैं...और दुनिया कहाँ की कहाँ पहुँच चुकी.....!!).....
खैर पी.एम. साहेब जी...६०-६५ घंटे पूर्व जो कुछ हमारी आंखों के सामने घटा...वो तो हम सब समेत आपने और भारत के तमाम राजाओं ने भी देखा...जी हाँ...राजाओं...!!वे राजा जो हम सबके द्वारा चुनकर संसद और देश की तमाम विधानसभाओं में भेजे जाते हैं...हमारी तकदीर तय करने...यानी हमारी जिन्दगी और मौत तय करने के लिए... और जिनकी जिन्दगी को सुचारू रूप से चलाने हेतु आप सब....और आप सब की जिन्दगी की सुरक्षा-व्यवस्था के लिए आप सब ही जो हजारों-हज़ार नौकर-चाकर-पुलिस-संतरी,एस.पी.जी.,बॉडी-गार्ड,हज़ार तरह की सुरक्षा-व्यवस्था,जवान-कमांडो...आदि-आदि....आप सब ख़ुद ही तय करते हो...आप ही तय करते हो किसानों को दी जाने वाली उनकी फसल का समर्थन-मूल्य.....भले ही सेठ-साहूकारों की प्रोफिट-पिपासा शांत ना कर सको....भले ही बड़े-बड़े घरानों की चीजों पे चस्पां होने वाले ऍम.आर.पी को कंट्रोल ना कर सको....आप ही तय करते हो देश के विकास में मंत्रियो और उनके गुर्गों और तमाम अफसरों और अन्य लोगों का योगदान क्या हो...भले ही अपना यह योगदान देने बहाने ये सारे लोग विकास की समूची राशि का गबन कर लें...और देश के बाहर मौजूद बैंकों में क़यामत तक के लिए जमा कर दें....आप काबू ना पा सको.....आप ही तय करते हो देश को चलाने का सिस्टम क्या हो....भले ही मंत्रियो और उनके गुर्गों और तमाम अफसरों और अन्य लोगों द्वारा ये सिस्टम हाईजैक कर लिया जाए....आप टुकुर-टुकुर ताकने के सिवा कुछ ना कर सको.....आप ही तय करते हो कि देश के विकास के लिए किसको क्या देना है...और किससे क्या लेना है....भले ही ये देने और लेने वाले ही इस देन-लेन में घपला कर इसमें भी बंदरबांट कर लें....और आप मुंह बांये खड़े रह जाएँ....आप ही तय करते हो देश को चलाने के लिए टैक्स का निर्धारण क्या हो...और उस टैक्स के आए हुए पैसे का समुचित वितरण कैसे हो....भले ही उस टैक्स निर्धारण में सैकडों भयानक विसंगतियां हों....और टैक्स लेने वाले आपके तमाम कलेक्टर टैक्स नहीं देना सिखाकर उसके एवज में अपना ही घर-बैंक-तिजोरी-पेट आदि-आदि सब ओवर-फ्लो की हद तक भरे जा रहे हों....यहाँ तक की रुपयों की गड्डी के बिस्तर पर सोते हैं और अय्याशी करते हैं....और यह पाक कार्य मंत्री-अफसर-नौकरशाह ही करते हैं.....आप की नाक के ठीक नीचे.....आपकी जानकारी में...गोया की आप ही की रहनुमाई में....६० सालों में आप लोगों की सुरक्षा-व्यवस्था में जितना खर्च हुआ है...उतने में तो देश के तमाम गरीब लोगों का राशन-पानी आ जाता....और जितना धन आपके मंत्री-अफसर-नौकरशाह-विधायक-सांसद और इन सबकी मिली-भगत से उद्योग-पतियों ने बैंकों का धन हड़प-गड़प-हज़म किया है...उतने से एक क्या कई भारतों का अकल्पनीय विकास हो सकता था...है...!!
.........मैं बताऊँ सर....,देश में होने वाले इन और उन तमाम प्रकार के हादसों के लिए अन्य और कोई नहीं,बल्कि आप सब ही और सीधे-सीधे तौर पर जिम्मेवार हो....और इसके लिए आप-सबको अभी-की-अभी फांसी लगा लेनी चाहिए....आप सब तो ख़ुद ही ऐसे जल्लाद हो कि...अपने सामने सब कुछ होते देखते हो...कसूरवारों को कभी दंड नहीं देते....सरकार चलाने के लिए तमाम समझौते करते हो...हर किसी को उसकी मनमानी करने देते हो...अपनी भी मनमानी करते हो...जो चाहे...जब चाहे...जैसे चाहे करते हो...चाहे वो देश-राज्य-शहर-गांव या किसी के भी हित में हो या ना हो....सिर्फ़ अपना हित और अपनी अय्याशी हो...सिर्फ़ अपने स्वार्थ-अपने अंहकार का पोषण हो....देश के इन-आप जैसे लोगों को फांसी भी हो तो कैसी हो....हम तो यह तय करने में भी अक्षम हैं....६० सालों में आप सबों ने अपने-अपने समय के शासनकाल में देश की जो दुर्गति की है...वो अकल्पनीय है....और शैतानों के लिए भी एक उदाहरण है.... प्रशासन-हीनता का ऐसा घटिया उदाहरण शायद नरक या जहन्नुम में भी ना मिले....!!!!देश की हर प्रकार की मशीनरी का इस तरह पंगु बना दिया जाना.....शैतानी परिकल्पना की सफलता का एक अद्भुत उदाहरण है....और इस बात का परिचायक भी कि जब नाकाबिल लोग कहीं पर शासन करते हैं तो कैसे सब कुछ ध्वस्त हो जाता है...!!
अब आप ये जरूर कहेंगे कि ये जो इतना विकास देश का हुआ है...क्या वो तुम्हारे(मेरे) बाप ने किया है.....नहीं माई-बाप नहीं....बल्कि मैं आपसे उलट कर ये पूछना चाहूँगा कि इस विकास में क्या वाकई देश के इस प्रभुसत्ता-संपन्न राजनीतिक वर्ग का कोई रत्ती-भर भी योगदान है.....??!!बल्कि देश के विवेकशील लोगों के अनुसार तो ये वर्ग उलटा विकास में रोड़ा ही है.....!!!!हे वर्तमान और तमाम निवर्तमान पी.एम्. साहेबों मैंने तो सूना है कि शैतान भी हैरान होता है और सबसे ये पूछता चल रहा है कि धरती पर भारत नाम के इस देश में राजनीतिक प्रभुसत्ता-संपन्न यह वर्ग शैतानियत में उनसे भी मीलों आगे कैसे निकल गया है कि किसी भी वाहन से पकड़ ही नहीं आता....और ये भी कि अब वो (शैतान)क्या करे...पहले शैतान थोड़े से थे....अब तो इस वर्ग के उदय होने और शक्ति-संपन्न होने से वो बेरोजगार हो गए हैं....सब निठल्ले बैठे आगे की योजना बना रहे हैं....उनके (शैतानों के )लास्ट सम्मेलन में ये प्रस्ताव पारित हुआ है कि अब शैतान परोपकार और पुण्य का कार्य करेंगे...अब उन कार्यों की रूप-रेखा बनाई जा रही है...जल्द ही इसे कार्यान्वित किया जायेगा...!!
..............हे वर्तमान और तमाम निवर्तमान पी.एम्. साहेबों....मंत्रियों...छोटे-बड़े-छुटभैय्ये नेताओं...तमाम सरकारी कारिंदों तमाम शक्तिशाली लोगों....... ऐसा लगता है कि अगरचे तुन्हें देश की जरुरत सिर्फ़-व्-सिर्फ़ अपने और अपने कुटुंब का स्वार्थ और हित साधने के लिए है...अपनी गंदी वासनाओं की पूर्ति के लिए देश की अस्मिता को बेच देने के लिए है....तो तुम्हे एक बार फ़िर राम-राम....मगर इसके लिए तुम सब अपने लिए एक नया देश (क्यूंकि गद्दारों को कौन अपने पास पनाह देगा...!!??)बना लो....हम देश के आम नागरिक तुम सबों को आश्वस्त करते हैं कि हम कई देशों की सरकारों को इस बात के लिए मना लेंगे कि अपने यहाँ से थोडी-थोडी जगह देकर इनके लिए एक नए देश के निर्माण में सहयोग करें....हमें आशा है कि हम ऐसा कर पायेंगे....क्यूंकि हम जानते हैं कि धरती का दिल बहुत बड़ा है.....!!!!
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2 टिप्‍पणियां:

अल्पना वर्मा ने कहा…

''हम देश के आम नागरिक तुम सबों को आश्वस्त करते हैं कि हम कई देशों की सरकारों को इस बात के लिए मना लेंगे कि अपने यहाँ से थोडी-थोडी जगह देकर इनके लिए एक नए देश के निर्माण में सहयोग करें....हमें आशा है कि हम ऐसा कर पायेंगे....क्यूंकि हम जानते हैं कि धरती का दिल बहुत बड़ा है.....!!!! ''

bas yahi hona baqi rah gaya hai..ishwar bhalaa kare
-'cricket world cup jitney ke liye jahan mahayagya hotey hain-'-
--Ajmal jaise khuuni ko ko abhi tak phaansi nahin de jaati-rajiv gandhi ke hatyarin ko kshamadaan ki soch rahey hain??--us desh dharati ka dil sach mein bahut bada hai..

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

वाह जी अच्‍छी शब्‍दों में पूरी भडास निकाली है आपने। पढकर लगा कि हां अभी भी देश में सच्‍चाई बयां करने वाले बाकी है। हांलांकि एक बात है कि देखो सरकार चाहे कांग्रेस हो चाहे बीजेपी हो चाहे कोई भी राजनीतिक दल हो हमारे देश में आज के समय में कोई ऐसा नहीं है जो देश के बारे में और देश की जनता के बारे में सोच सके बस सब सत्‍ता पर आते ही हिसाब लगाते हैं कि कितना खर्च हुआ कितना चाहिए ताकि सात पुस्‍तों तक काम बन जाए। हम तुम या कोई और भूखा मरे बेरोजगार रहे या कुछ भी हो इन्‍हें कोई फर्क नहीं पडता। इनके बारे में जितना लिखोगे उतना थोडा है

 
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