भारत का संविधान

"हम भारतवासी,गंभीरतापूर्वक यह निश्चय करके कि भारत को सार्वभौमिक,लोकतांत्रिक गणतंत्र बनाना है तथा अपने नागरिकों के लिए------- न्याय--सामाजिक,आर्थिक,तथा राजनैतिक ; स्वतन्त्रता--विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास,आस्था,पूजा पद्दति अपनाने की; समानता--स्थिति व अवसर की व इसको सबमें बढ़ाने की; बंधुत्व--व्यक्ति की गरिमा एवं देश की एकता का आश्वासन देने वाला ; सुरक्षित करने के उद्देश्य से आज २६ नवम्बर १९४९ को संविधान-सभा में,इस संविधान को अंगीकृत ,पारित तथा स्वयम को प्रदत्त करते हैं ।"

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रिश्ते......और ब्लोगिंग....!!

गुरुवार, 27 नवंबर 2008


(रचना जी की कविता पर...)
ब्लोगिंग इन्टरनेट की देन है......,
....और रिश्ते आदमी का इजाद...!!
...........ब्लोगिंग एक शौक है....,
.........और रिश्ते एक जरूरत....!!
ब्लोगिंग हमारी सोच है.......,
और रिश्ते सोच का सार्थक अंत....!!
रिश्ते अगर किसी भी चीज़ से बनते हैं....,
तो उन्हें बेशक बन ही जाने दें....!!
रिश्ते बाकी ही कहाँ रहे...
अब भला आदमियत में....!!
अब तो सिर्फ़ आदमी है....,
और ढेर सारे उसके शौक...!!
इनके बीच अगर थोड़े-से रिश्ते..
पैदा भी हो जाएँ...तो हर्ज़ क्या है....??
रिश्ते तो प्रश्न हैं...हमारे...बीच के संबधों का...,
और हम उनके उत्तर...अपने संबधों द्वारा...!!
जिनका कोई भी नही...
उनसे पूछिए रिश्तों का अर्थ....!!
जिन्होंने खोये हैं रिश्ते...
वे ही जानते हैं...रिश्तों के मानी...!!
रिश्ते तो प्यार हैं...बेशक तकरार भी...,
उसकी बाद उनका अहसास भी...
थोड़ा रूमानी भी...थोड़ा नफरत भी...
नफरत से सीख लेकर....
पुनः प्यार भी ला सकते हम....
और प्यार ही प्यार हो..........
तो फिर बात ही क्या....
मगर ब्लोगिंग जरूरी हो या ना हो...
प्यार तो जरूरी है.....!!
और उसके लिए रिश्ते तो...
उससे भी ज्यादा जरूरी....!!
ब्लोगिंग रहे ना रहे....
रिश्ते हमेशा बच रहेंगे....
रिश्ते अगर बच गए....
तो बच रहेंगे हम भी....
बेशक ब्लोगिंग ही करने के लिए....!!
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5 टिप्‍पणियां:

www.creativekona.blogspot.com ने कहा…

Bhai Bhootnath ji,
Rishte...Apne bahut theek likha hai.Rishte to hamare banaye huye ahsas hain.jinhe hum mahsoos karte hain.Ooparee sambandh to ek madhyam hai,in rishton ko age badhane,jodane,todane ya samapt karne ka.Jahan tak bloging ka saval ha to ye ek plaitform hai apnee bat kahne ka.ab ye hamaree soach par nirbhar hai ki ham iska istemal kaise karte hain..srijnatmak ya dhvansatmak?
Hemant Kumar

seema gupta ने कहा…

ब्लोगिंग रहे ना रहे....
रिश्ते हमेशा बच रहेंगे....
रिश्ते अगर बच गए....
तो बच रहेंगे हम भी....
" sach hai"

रचना ने कहा…

अपनी एक जुटता का परिचय दे रहा हैं हिन्दी ब्लॉग समाज । आप भी इस चित्र को डाले और अपने आक्रोश को व्यक्त करे । ये चित्र हमारे शोक का नहीं हमारे आक्रोश का प्रतीक हैं । आप भी साथ दे । जितने ब्लॉग पर हो सके इस चित्र को लगाए । ये चित्र हमारी कमजोरी का नहीं , हमारे विलाप का नहीं हमारे क्रोध और आक्रोश का प्रतीक हैं । आईये अपने तिरंगे को भी याद करे और याद रखे की देश हमारा हैं ।

Akshaya-mann ने कहा…

pyar kjaruri hai.....
rishte jaroori hain.......
bilkul satya baat hai beshaq bache rahaenge ......
aur rishte bhi bane rahainge,,,,,.
'akshaya-bandhan jo ban gaya hai.......

मैंने मरने के लिए

रिश्वत ली है ,मरने के लिए घूस ली है

????
๑۩۞۩๑वन्दना
शब्दों की๑۩۞۩๑


उन सैनिकों के साहस के लिए बलिदान

और समर्पण के लिए देश की हमारी रक्षा

के लिए जो बिना किसी स्वार्थ से बिना

मतलब के हमारे लिए जान तक दे देते

हैं
अक्षय-मन

राजीव थेपड़ा ( भूतनाथ ) ने कहा…

...............

 
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