भारत का संविधान

"हम भारतवासी,गंभीरतापूर्वक यह निश्चय करके कि भारत को सार्वभौमिक,लोकतांत्रिक गणतंत्र बनाना है तथा अपने नागरिकों के लिए------- न्याय--सामाजिक,आर्थिक,तथा राजनैतिक ; स्वतन्त्रता--विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास,आस्था,पूजा पद्दति अपनाने की; समानता--स्थिति व अवसर की व इसको सबमें बढ़ाने की; बंधुत्व--व्यक्ति की गरिमा एवं देश की एकता का आश्वासन देने वाला ; सुरक्षित करने के उद्देश्य से आज २६ नवम्बर १९४९ को संविधान-सभा में,इस संविधान को अंगीकृत ,पारित तथा स्वयम को प्रदत्त करते हैं ।"

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प्रेम जिसे कहते हैं.....!!

रविवार, 18 जनवरी 2009

मचल जाए तो किसी ठौर से ना बांधा जाए......
इस सकुचाहट के पीछे कितना कुछ बहता जाए......
बंद आंखों से ये आंसू पीता जाए....
और आँख खुले तो जैसे सैलाब सा बह जाए....
बेशक मौन अपने मौन में.....
दर्द ढेर सारे पी जाता हो......
मगर मौन जो टूटे.....
जिह्वा फफक कर रह जाए....
समूची आत्मा को आंखों में उतार ले जो....
प्रेम जिसे कहते हैं....
वो पलकों पे उतर आए.....
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10 टिप्‍पणियां:

हिमांशु ने कहा…

प्रेम की गहनता होती ही ऐसी है कि मूक,अव्यक्त वह सब कुछ व्यक्त और मुखर कर देती है.
रचना के लिये धन्यवाद.

Anil Pusadkar ने कहा…

अच्छी और सच्ची रचना।

विनय ने कहा…

बहुत बढ़िया

लाजवाब रचना है, लिखते रहें

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गुलाबी कोंपलें | चाँद, बादल और शाम | तकनीक दृष्टा/Tech Prevue | आनंद बक्षी | तख़लीक़-ए-नज़र

डॉ .अनुराग ने कहा…

khoob ....bahut khoob...

MUFLIS ने कहा…

prem ke bhaav jb aatma ki gehraaee ko chhoo lete haiN tb izhaar, bina alfaaz ke hi mumkin ho jata hai...
bahot hi umda nazm.....
badhaaee !!
---MUFLIS---

tripti ने कहा…

Hi Rajeev,I got some awards and i want to pass it to your blog for your heart touching poems!! please come and pick it up!!

Cheers!!

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

वाहवा भूतनाथ जी बढ़िया कहा....

seema gupta ने कहा…

प्रेम जिसे कहते हैं....
वो पलकों पे उतर आए.....

Regards

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत बढ़िया बात कही आपने

Capricornearth ने कहा…

waah khoob likha hai aapne

 
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