भारत का संविधान

"हम भारतवासी,गंभीरतापूर्वक यह निश्चय करके कि भारत को सार्वभौमिक,लोकतांत्रिक गणतंत्र बनाना है तथा अपने नागरिकों के लिए------- न्याय--सामाजिक,आर्थिक,तथा राजनैतिक ; स्वतन्त्रता--विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास,आस्था,पूजा पद्दति अपनाने की; समानता--स्थिति व अवसर की व इसको सबमें बढ़ाने की; बंधुत्व--व्यक्ति की गरिमा एवं देश की एकता का आश्वासन देने वाला ; सुरक्षित करने के उद्देश्य से आज २६ नवम्बर १९४९ को संविधान-सभा में,इस संविधान को अंगीकृत ,पारित तथा स्वयम को प्रदत्त करते हैं ।"

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वो रोये तो डर लगता है.....!!

बुधवार, 14 जनवरी 2009


वो रोये तो डर लगता है

मेरी जान में वो बसता है !!

वो हमसे जब भी मिलता है

सहमा-सहमा-सा ही रहता है !!

अक्सर ही शाम हो जाती है

मुझी को वो देखा करता है !!

हमने लाज तिरी रख ली है

तू क्या वरना खुदा लगता है !!

खुशी हरदम तो नहीं मिलती है

गम में बहुत ही बुरा लगता है !!

इक भी साँस रूक जाए है तो

जीवन क्या ये जीवन रहता है !!

क्या वो गम से बेदम हुआ है

कितना तो हंसता ही रहता है !!

हम तो वस्ल के मारे हैं "गाफिल"

हिज्र का क्यूँ तू चर्चा करता है !!
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5 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

वाह वाह बहुत खूब।

विनय ने कहा…

बहुत बढ़िया

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आप भारतीय हैं तो अपने ब्लॉग पर तिरंगा लगाना अवश्य पसंद करेगे, जाने कैसे?
तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

विनीता यशस्वी ने कहा…

ek baar fir

wah wah wah

BrijmohanShrivastava ने कहा…

ब्लॉग का नाम भूतनाथ ही क्या बुरा था जो स्लोली स्लोली बदल रहे हो /देखिये वो जब भी आपसे मिलता है तो सहमा सा रहता है मतलब आप से आतंकित है /यह सही है की खुशी भी हर दम नहीं मिलती मगर यह भी सही है की गम भी हमेशा नही रहता ""क्या वो गम से बेदम हुआ कितना तो हँसता ही रहता है ""बहुत सुंदर बिल्कुल उस तरह के ::तुम इतना जो मुस्करा रहे हो क्या गम है जिसको छिपा रहे हो "

शाश्‍वत शेखर ने कहा…

सच कहा, हम भी वस्ल के मारों में से ही हैं|

 
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