भारत का संविधान

"हम भारतवासी,गंभीरतापूर्वक यह निश्चय करके कि भारत को सार्वभौमिक,लोकतांत्रिक गणतंत्र बनाना है तथा अपने नागरिकों के लिए------- न्याय--सामाजिक,आर्थिक,तथा राजनैतिक ; स्वतन्त्रता--विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास,आस्था,पूजा पद्दति अपनाने की; समानता--स्थिति व अवसर की व इसको सबमें बढ़ाने की; बंधुत्व--व्यक्ति की गरिमा एवं देश की एकता का आश्वासन देने वाला ; सुरक्षित करने के उद्देश्य से आज २६ नवम्बर १९४९ को संविधान-सभा में,इस संविधान को अंगीकृत ,पारित तथा स्वयम को प्रदत्त करते हैं ।"

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कभी धुप चिलचिलाये.....!!

मंगलवार, 20 जनवरी 2009



कभी धुप चिलचिलाये
कभी शाम गीत गाये....!!
जिसे अनसुना करूँ मैं
वही कान में समाये.....!!
उसमें है वो नजाकत
कितना वो खिलखिलाए !!
सरेआम ये कह रहा हूँ
मुझे कुछ नहीं है आए...!!
चाँद भी है अपनी जगह
तारे भी तो टिमटिमाये...!!
जिसे जाना मुझसे आगे
मुझपे वो चढ़ के जाए...!!
रहना नहीं है "गाफिल"
इतना भी जुड़ ना जाए...!!
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12 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सही!!

विवेक सिंह ने कहा…

रास्ता मत रोको जी साइड दो !

"अर्श" ने कहा…

bahot khub likha hai aapne....

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

Wah..wa bandhuwar wah..

seema gupta ने कहा…

चाँद भी है अपनी जगह
तारे भी तो टिमटिमाये...!!
जिसे जाना मुझसे आगे
मुझपे वो चढ़ के जाए...!!
रहना नहीं है "गाफिल"
इतना भी जुड़ ना जाए...!!
" सच है एक बार जुड़ने के बाद टूटना मुश्किल होता है फ़िर जीवन तो आना जाना है..."

Regards

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

वाह भाई वाह अच्‍छा लिखा है आपने बहुत खूब बेहतरीन रचना के लिए बधाई स्‍वीकारें

विनीता यशस्वी ने कहा…

सरेआम ये कह रहा हूँ
मुझे कुछ नहीं है आए...!!
चाँद भी है अपनी जगह
तारे भी तो टिमटिमाये...!!

Achhi line

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

अच्छी लगी आपकी यह रचना

Amit ने कहा…

bahut sundar....

दिगम्बर नासवा ने कहा…

जिसे अनसुना करूँ मैं
वही कान में समाये.....!!


good, very well....sahi likhaa

प्रकाश बादल ने कहा…

बहुत अच्छा भाई भूत नाथ ( नहीं भाई चोपड़ा जी)

वाह।

JHAROKHA ने कहा…

Respected sir,
Bahut..bahut achchha geet hai.badhai.

 
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