भारत का संविधान

"हम भारतवासी,गंभीरतापूर्वक यह निश्चय करके कि भारत को सार्वभौमिक,लोकतांत्रिक गणतंत्र बनाना है तथा अपने नागरिकों के लिए------- न्याय--सामाजिक,आर्थिक,तथा राजनैतिक ; स्वतन्त्रता--विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास,आस्था,पूजा पद्दति अपनाने की; समानता--स्थिति व अवसर की व इसको सबमें बढ़ाने की; बंधुत्व--व्यक्ति की गरिमा एवं देश की एकता का आश्वासन देने वाला ; सुरक्षित करने के उद्देश्य से आज २६ नवम्बर १९४९ को संविधान-सभा में,इस संविधान को अंगीकृत ,पारित तथा स्वयम को प्रदत्त करते हैं ।"

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आदमी की इज्ज़त कुछ और होती है.....!!

गुरुवार, 18 दिसंबर 2008


भई बनी हुई चीजों की जीनत कुछ और होती है......
और टूटी हुई चीजों की कीमत कुछ और होती है.....!!
मर-मर कर जीना तो बहुत ही आसान है ऐ दोस्त....
जिंदादिल लोगों की तो हिम्मत कुछ और होती है.....!!
एक ही बार तो आता है आदम यहाँ धरती पर.....
बनकर रहे आदम ही तो रिवायत कुछ होती है....!!
हम गाफिल लोग ही रहते हैं आदतों के बाईस........
और फकीरों की तो हाजत ही कुछ और होती है...!!
जो "धन"को जीते हैं उनका चेहरा होता है कुछ और .......
प्यार बांटने वालों की तो लज्जत ही कुछ और होती है.....!!
लोग जाने क्या-क्या "फिजूल"चाहते हुए ही मर जाते हैं.....
जिन्दगी जीने वालों की तो चाहत ही कुछ और होती है.....!!
जब हम सिर्फ़ अपने लिए जीते हैं तो गम ही मिलता है.....
सबपे जीते इंसा पे अल्ला की इनायत कुछ और होती है....!!
धारा के साथ जीने को तो सब जीते हैं "गाफिल"
इसके ख़िलाफ़ वालों की ताकत कुछ और होती है.....!!
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6 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

जब हम सिर्फ़ अपने लिए जीते हैं तो गम ही मिलता है.....
सबपे जीते इंसा पे अल्ला की इनायत कुछ और होती है....!!


-बहुत उम्दा बात कही!!

हिमांशु ने कहा…

"मर-मर कर जीना तो बहुत ही आसान है ऐ दोस्त....
जिंदादिल लोगों की तो हिम्मत कुछ और होती है.....!!"

सही कहा : "जिन्दगी जिन्दादिली का नाम है / मुर्दादिल खाक जिया करते हैं.

धन्यवाद इस रचना के लिये .

mahashakti ने कहा…

शानदार प्रस्‍तुति
महाशक्ति

BrijmohanShrivastava ने कहा…

भूतनाथ जी = जय शिव ॐ /रचना सुंदर /मर मर के लोग क्यों जीते है "" जी रहे क्यों कि मरे नहीं है /मरे नहीं है क्योंकि मौत नही आई है /मौत सोचती होगी मरों को क्या मारना / "" वो लाश थी तभी तैरती रही ,डूबने के लिए जिंदगी चाहिए ""

प्रदीप मानोरिया ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना मजेदार और यथार्थ

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मर-मर कर जीना तो बहुत ही आसान है ऐ दोस्त....
जिंदादिल लोगों की तो हिम्मत कुछ और होती है.....!!

बहुत खूब सूरत है आपका अंदाज़
दमदार ग़ज़ल

 
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