भारत का संविधान

"हम भारतवासी,गंभीरतापूर्वक यह निश्चय करके कि भारत को सार्वभौमिक,लोकतांत्रिक गणतंत्र बनाना है तथा अपने नागरिकों के लिए------- न्याय--सामाजिक,आर्थिक,तथा राजनैतिक ; स्वतन्त्रता--विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास,आस्था,पूजा पद्दति अपनाने की; समानता--स्थिति व अवसर की व इसको सबमें बढ़ाने की; बंधुत्व--व्यक्ति की गरिमा एवं देश की एकता का आश्वासन देने वाला ; सुरक्षित करने के उद्देश्य से आज २६ नवम्बर १९४९ को संविधान-सभा में,इस संविधान को अंगीकृत ,पारित तथा स्वयम को प्रदत्त करते हैं ।"

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प्रेम अजर है...प्रेम अमर है.....!!

बुधवार, 10 दिसंबर 2008



प्रेम अमर है....और अजर है.....
प्रेम है पूजा...इसमें असर है....!!
प्यार में डूबे....वो ही जाने....
इसका कितना गहरा असर है!!
नाम किसी का लेते ही हो...
जाता है साँसों पे असर है...!!
आँख से आँख मिलते ही इक
आग का हो जाता गो बसर है!!
तूफां में इक किश्ती हो जैसे
आती-जाती हर-इक लहर है !!
प्रेम में जीना हो या मरना....
"गाफिल"अमृत या कि ज़हर है !!
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11 टिप्‍पणियां:

नीरज गोस्वामी ने कहा…

प्यार में डूबे....वो ही जाने....
इसका कितना गहरा असर है
सत्य वचन...खूबसूरत रचना....
नीरज

Udan Tashtari ने कहा…

बिल्कुल सही...बेहतरीन रचना!!!

परमजीत बाली ने कहा…

प्यार में डूबे....वो ही जाने....
इसका कितना गहरा असर है

bahut badhiyaa likhaa hai..

कविता वाचक्नवी ने कहा…

आपका हिन्दी भारत से जुड़ने की इच्छा वाला सन्देश मिला। आप तो समूह के सदस्य हैं गत कुछ दिन से और आपके भेजे सन्देश भी सभी सदस्यों को प्राप्त हो रहे हैं। आपको भी समूह के सदस्यों द्वारा पूरे समूह के लिए भेजे गए सन्देश मिल ही रहे होंगे।
तत्सम्बन्धी अन्य कोई बात हो तो निस्संकोच पूछ सकते हैं। आपके पास मेरा आईडी होगा अब तो। अथवा समूह के पते
HINDI-BHARAT@yahoogroups.com
पर मेल कर के भी पूछ सकते हैं।

हिमांशु ने कहा…

बहुत अच्छा लगा पढ़कर. धन्यवाद.

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

aapki ye rachna padkar aanad aa gaya .. pyar hi sab kuch hai ..

aapko bahut bahut badhai

maine kuch naya likha hai , aapka aashirwad chaiye.


vijay
http://poemsofvijay.blogspot.com/

दिगम्बर नासवा ने कहा…

प्रेम को बयान करती सुंदर कृति है
आपका कल्पना लोक बहुत हि सुंदर है

दीप से दीप जलाते चलो
प्रेम की गंगा बहाते चलो

डॉ .अनुराग ने कहा…

प्रेम भी एक नशा है भाई !

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

जो प्यार करे वही जाने .सुंदर लिखा है आपने

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

प्रेम से बोलो : : :

क्‍या बात है मजा आ गया क्‍या लिखा है आपने

तूफां में इक किश्ती हो जैसे
आती-जाती हर-इक लहर है !!
प्रेम में जीना हो या मरना....
"गाफिल"अमृत या कि ज़हर है !!

सच में तो प्रेम को कुछ कहा ही नहीं जा सकता कि प्रेम अमृत है या जहर है लेकिन कुछ भी प्रेम लक्ष्‍मी की तरह है जब आता है तो चारों तरफ सुकुन ही सुकून होता है लेकिन जब जाता है तो उफ

अच्‍छा लिखा आपने बधाई हो

bhoothnath ने कहा…

आप सबके इतने प्रेम से भूतनाथ इतना अभिभूत हुआ जा रहा है...कि वापस धरती पर आना चाहता है...मेरी गुजरी हुई दुनिया के दोस्तों आप-सबको भूतनाथ का सलाम....और हाँ प्यार भी तो....सच.....!!

 
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