भारत का संविधान

"हम भारतवासी,गंभीरतापूर्वक यह निश्चय करके कि भारत को सार्वभौमिक,लोकतांत्रिक गणतंत्र बनाना है तथा अपने नागरिकों के लिए------- न्याय--सामाजिक,आर्थिक,तथा राजनैतिक ; स्वतन्त्रता--विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास,आस्था,पूजा पद्दति अपनाने की; समानता--स्थिति व अवसर की व इसको सबमें बढ़ाने की; बंधुत्व--व्यक्ति की गरिमा एवं देश की एकता का आश्वासन देने वाला ; सुरक्षित करने के उद्देश्य से आज २६ नवम्बर १९४९ को संविधान-सभा में,इस संविधान को अंगीकृत ,पारित तथा स्वयम को प्रदत्त करते हैं ।"

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हे सुभाष !!अब हम क्या करें....???

मंगलवार, 16 दिसंबर 2008

हे सुभाष !! अब हम क्या करें......??
आज रांची हल्ला में नदीम भाई की एक पोस्ट देखी अमेरिकी राष्ट्रपति बुश पर एक पत्रकार द्वारा जूता फेंके जाने को ग़लत ठहराने को लेकर....मुझसे रहा नहीं गया.....और उनको लिखी प्रतिक्रिया यहाँ भी चस्पां कर दी.....एक नागरिक की प्रतिक्रिया के रूप में ...सम्भव है कि मेरा गुस्सा नाजायज हो मगर प्रश्न तो यही है कि इलाज़ आखिर क्या है....उत्तर आखिर क्या हैं ??आगे हमको करना क्या है....??भारत की समस्याएं क्या हैं....और उनका हल क्या है .....सिर्फ़ जबानी जमा-खर्च..........कि इससे आगे भी कुछ....और वह कुछ क्या.............??????

...........................बस एक ही बात कहूँगा भाई....कि देश से बहुतारह प्यार करने वाले इन्सानों के पास जब कोई चारा नहीं बचता तब वे ऐसे कृत्य करने को विवश हो जाते हैं... हजारों ऐसी घटनाएं हैं जहाँ एक अपराधी को दंड नहीं मिला.....अंत में जनता ने हिंसा द्वारा...रक्तपात द्वारा बात का उपसंहार किया.......इसे ग़लत नहीं ठराया जा सकता.......सच तो यह है कि तमाम पढ़े-लिखे लोग तो अपना भविष्य...अपनी नौकरी....मानवाधिकार...और ना जाने कितने ही अनजान कारणों से जरुरी कदम नहीं उठाते....मामला सर से बहुत ऊपर जा पहुंचता है...और तमाम विद्वान-विज्ञ जन चीख-पुकार मचाते रह जाते हैं....अंत में जनता अपना फैसला देती है....तब हम फिर चीखने लग जाएँ...कि हाय-हाय ये तो ग़लत हुआ..... ये तो ग़लत हुआ..... अरे भई जब मब कुछ कबाड़ नहीं पाते तो जो कुछ लोग कुछ कबाड़ने की चेष्टा करते हैं...तो उन्हें करने ही दें ना...ये दरअसल उत्तेजना भर नहीं है....आप देखियेगा भारत में आगे इससे भी बुरा होने जा रहा है....मेरे देखे तो भारत की सड़कों पर तरह-तरह के राजनीतिक अपराधी ,जो तमाम सबूतों के मद्देनज़र और जनता तथा मीडिया की नज़र में पुख्ता तौर पर अपराधी हैं,दौड़ा- दौड़ा कर मारे जाने वाले हैं...और सम्भव है कि उनका नेतृत्व मेरे या आपके बीच ही के कुछ लोग कर रहे हों...या ख़ुद हम ही हों....!!!! असल में भाई सब्र की भी एक इन्तहां होती है....भारत के सन्दर्भ में वो इन्तेहाँ अब ख़त्म होने को आई है....या ख़त्म हो ही चुकी है...अपराधी मन- चले व्यभिचारी सांडों की तरह छुट्टे घूम रहें हैं....और भारत के हर महकमे में...सड़क पर....घर में...हर जगह पर भारत माता का बलात्कार करते...उसकी आत्मा को कचोटते....उसका चीरहरण...उसका मान-मर्दन करते...और उसकी मासूम संतानों पर घनघोर अत्याचार करते राक्षसों की भाति अट्टहास करते....फुफकार करते... अपने अंहकार-शक्ति-धन आदि का फूहड़ प्रदर्शन करते.....विद्रूप रचते.....गोया कि सत्ता के अंधे मद में अपने लिंग का प्रदशन करते घूम रहे हैं...इस सत्ता को कौन जवाब देगा....जनता ही ना.....झारखंड के सन्दर्भ में तो यह तथ्य और भी बेबाक और अश्लीलता की हद से भी गया-बीता या नंगा है....तो इसका इलाज आख़िर क्या है...!!सच जानिए भाई....जनता इन सबको सरेआम पूरी तरह नंगा करके इतना मारेगी-इतना मारेगी कि इनकी सात पुश्त तक की संताने भी प्रदर्शन नाम की चीज़ क्या होती है....यह तक भूल जायेगी....हम और आप जैसे लोग सभ्यता के नाम पर चीखते ही रह जायेंगे कि हाय..हाय ये तो ग़लत है...ये तो ग़लत है....!! अंत में सच तो यही है....परिवर्तन के बारे में हम जैसे लोग सिर्फ़ सोचते हैं....परिवर्तन तो अंततः जनता ही करती है.....करती है ना.....!!!
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5 टिप्‍पणियां:

Keshi ने कहा…

ty for visiting my blog!

However I dont speak/read/write Hindi. So I'd like u to translate ur comment in my current post to English if possible. tnxx!

Keshi.

sareetha ने कहा…

भूतनाथ जी .
वह शुभ दिन कभी आएगा ,मुझे इसमें संदेह है । क्योंकि यहां सब अपने स्तर पर अपना हिस्सा पाकर संतुष्ट होने की हद तक स्वार्थी हो चुके हैं ।

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

अंत में सच तो यही है....परिवर्तन के बारे में हम जैसे लोग सिर्फ़ सोचते हैं....परिवर्तन तो अंततः जनता ही करती है.....करती है ना.....!!!

बिल्कुल सोलह आने सच्ची बात।

seema gupta ने कहा…

" hmm baat to ptey ki hai.."

regards

प्रकाश बादल ने कहा…

भाई भूतनाथ आप हमारे ब्लॉग पर जब आते हैं तो हमें बिल्कुल डर नहीं लगता। वरना भूतनाथ से कौन नहीं डरता लेकिन ये आपका लेख अच्छा लगा कि अगर जनता का आक्रोश जागा तो समझिए सब का सब न एफ आई आर न कोई रिपोर्ट बस फैसला ऑन दे स्पॉट। बिना मीटर लिखने वाला आपका छोटा सा प्रशंसक प्रकाश बादल्

 
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