भारत का संविधान

"हम भारतवासी,गंभीरतापूर्वक यह निश्चय करके कि भारत को सार्वभौमिक,लोकतांत्रिक गणतंत्र बनाना है तथा अपने नागरिकों के लिए------- न्याय--सामाजिक,आर्थिक,तथा राजनैतिक ; स्वतन्त्रता--विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास,आस्था,पूजा पद्दति अपनाने की; समानता--स्थिति व अवसर की व इसको सबमें बढ़ाने की; बंधुत्व--व्यक्ति की गरिमा एवं देश की एकता का आश्वासन देने वाला ; सुरक्षित करने के उद्देश्य से आज २६ नवम्बर १९४९ को संविधान-सभा में,इस संविधान को अंगीकृत ,पारित तथा स्वयम को प्रदत्त करते हैं ।"

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चाँद की दुनिया में है पहला कदम !!

बुधवार, 22 अक्तूबर 2008

भारत ने भी अपनी ख़ुद की ताकत से चाँद पर अपने कदम बढ़ा दिए,अगले कुछ ही दिनों में "हम"चाँद पर होंगे !!.....हम कौन ? हम याने भारत !!भारत याने हमारा देश !!हमारा देश माने ....वह जगह जहाँ कि हम रहते हैं....जहाँ की मिटटी का उपजा अन्न हम खाते हैं....जहाँ का दिया हम पहनते हैं.... और संजोग से जिसकी किसी भी उपलब्धि पर हमें एक ख़ास किस्म का गर्व बोध होता है...जिसके खिलाड़ियों के किसी खेल के मैदान में जीतने पर हम खुशियों से उत्त्फुल्ल होने लगते हैं......भारत सिर्फ़ एक शब्द ही नहीं हमारी भावना है.... कुछ क्षेत्रों में पाई सफलताओं का जब हम जश्न मनाते हैं...क्या वो हमने ख़ुद ने अर्जित की होती हैं ??यहाँ तक दूर दिगंत में भी कोई भारतीय मूल का व्यक्ति कोई सफलता प्राप्त करता है...तो हमारे देश के अखबार नाचने-गाने लगते हैं...हालाँकि कोई सौ-डेढ़ सौ वर्ष पहले उसके पूर्वज सुदूर किसी देश में जाकर बसे होंगे....और अब उनका भारत से नाता कभी-कभार आ जाने वाली यादों से ज्यादा कुछ नहीं .....!!
यह सब क्या है ? जाहिर है कि हम जहाँ रहते हैं....उस देश का नाम हमारे लिए सिर्फ़ एक शब्द भर नहीं होता...बल्कि हमारे दिल की अथाह गहराईयाँ उससे जाकर जुड़ जाती हैं.... जैसे हमारे बच्चे की किसी सफलता पर हम स्वयं इतराते हैं ...वैसे भारत की किसी भी सफलता पे हम दिवाली मनाते हैं ....!!
यह सफलता भारत के चंद सपूतों ने अपने कठिनतम कठोर संघर्षों ...कठिनतम कठोर कर्मों ...अदम्य जिजीविषा...अपने भीतर आगे जाने की भीषण आग से झुलाल्स्ते हुए पायी होती है.....मगर उनकी सफलता हमारी सफलता बन जाती है क्यूँ.... हमारे भीतर इससे क्या घटता है....इस प्रश्न का उत्तर ही भारत के प्रति हमारे प्रेम का परिचायक है !!
..................................मगर यह किस किस्म का हमारा प्रेम है...जहाँ हम एक तरफ़ तो अपने किसी भी मिशन की सफलता के लिए हजारों-लाखों प्रयत्न करते हैं...अथक श्रम करते हैं..... मगर भारत की बदहाल हालत को उसके हाल पर ही छोड़ देते हैं....याकि भारत को सवारने का जिम्मा हमने बेहद गन्दी कौम (जिसके लिए कोई भी गली मुझे कमतर जान पड़ती है ) को दे रखा है....निजी क्षेत्र में जो लोग भयंकर कर्म में तल्लीन है ...वहीं सार्वजनिक क्षेत्र में ....भयंकर लालच..लिप्सा...भ्रष्ट...और तमाम अनैतिक कामों में लिप्त....!!देश के कतिपय अच्छे लोग बहरत को जो गौरव प्रदान करते हैं....चंद घटिया लोग उस गौरव को उससे भी ज्यादा मिटटी में मिला देते हैं....ऐसे लोगों के साथ क्या करना चाहिए ...?यह सवाल आज का सबसे बड़ा सवाल है !!
हमारे चंद्र मिशन की सफलता हमारे चालीस वर्षो पहले अन्तरिक्ष में घुसपैठ करने की करने की कहानी है....क्या हमारे राजनेता...हमारे नौकरशाह इससे कुछ सबक ले सकते है....और वास्तव में भारत को उल्लेखनीय...रचनात्मक...सबल..देश भक्ति से परिपूर्ण...अंततः उल्लेखनीय नेतृत्व दे सकते हैं !!??
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1 टिप्पणी:

मनुज मेहता ने कहा…

मगर यह किस किस्म का हमारा प्रेम है...जहाँ हम एक तरफ़ तो अपने किसी भी मिशन की सफलता के लिए हजारों-लाखों प्रयत्न करते हैं...अथक श्रम करते हैं..... मगर भारत की बदहाल हालत को उसके हाल पर ही छोड़ देते हैं....याकि भारत को सवारने का जिम्मा हमने बेहद गन्दी कौम (जिसके लिए कोई भी गली मुझे कमतर जान पड़ती है ) को दे रखा है....

bahut khoob kaha aapney janab
bahut sahi.

 
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