भारत का संविधान

"हम भारतवासी,गंभीरतापूर्वक यह निश्चय करके कि भारत को सार्वभौमिक,लोकतांत्रिक गणतंत्र बनाना है तथा अपने नागरिकों के लिए------- न्याय--सामाजिक,आर्थिक,तथा राजनैतिक ; स्वतन्त्रता--विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास,आस्था,पूजा पद्दति अपनाने की; समानता--स्थिति व अवसर की व इसको सबमें बढ़ाने की; बंधुत्व--व्यक्ति की गरिमा एवं देश की एकता का आश्वासन देने वाला ; सुरक्षित करने के उद्देश्य से आज २६ नवम्बर १९४९ को संविधान-सभा में,इस संविधान को अंगीकृत ,पारित तथा स्वयम को प्रदत्त करते हैं ।"

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मेरे प्यारे-प्यारे-प्यारे-प्यारे और बेहद प्यारे दोस्तों.........!!!

रविवार, 30 अगस्त 2009

मैं भूत बोल रहा हूँ..........!!
मेरे प्यारे-प्यारे-प्यारे-प्यारे और बेहद प्यारे दोस्तों.........
आप सबको इस भूतनाथ का बेहद ह्रदय भरा प्रेम.........दोस्तों पिछले समय में मुझे मिले कईयों आमंत्रणों में में मैंने कुछ आमंत्रणों को स्वीकार कर अनेक ब्लॉग में लिख रहा था.....बेशक एक ही आलेख हरेक ब्लॉग में होता था....आज अपनी एक ब्लागर मित्र की आज्ञा या यूँ कहूँ कि एक प्यारी-सी राय मान कर अपने को आज से सिर्फ़ एकाध ब्लाग में सीमित किए दे रहा हूँ...ये ब्लॉग कम्युनिटी ब्लोगों में "कबीरा खड़ा बाज़ार में","रांची-हल्ला" और मेरा ख़ुद का एक मात्र निजी ब्लॉग "बात पुरानी है" तक ही सीमित रहेंगे....!!
बाकी ब्लॉगों के सम्पादकों से मेरा अनुरोध हैं....कि मेरा यह अनुरोध शीघ्रता-पूर्वक स्वीकारते हुए मुझे तुंरत अपने ब्लॉगों से हटा दें.....इतनी जगहों पर एक आलेख भी चस्पां कर पाने में मैं ख़ुद को असमर्थ पाता हूँ....हाँ,इतने दिनों तक मुझे आदर और प्रेम देने के लिए मैं तमाम सम्पादकों का आभारी हूँ....आगे के लिए मुझे क्षमा किया जाए....भूतनाथ अब ख़ास तौर पर "बात पुरानी है !!" पर ही पाया जाएगा.....वैसे भी भूतों के लिए पुराना होकर "गया-बीता" हो जन ही उचित होता है.....तो दोस्तों आप सबको मेरे प्रेम के साथ ऊपर बताये गए ब्लॉगों से मेरी विदा.....एक स्नेहिल ह्रदय आत्मा........भूतनाथ
हरकीरत जी आपकी इस प्रेम भरी राय के लिए मैं आपका भी शुक्रिया अदा करता हूँ....दरअसल मैं ख़ुद भी यही करना चाह रहा था....मगर कुछ प्रेमियों के प्रेम के कारण ऐसा कर नहीं पा रहा था....आज आपकी आज्ञा से ये मैं कर रहा हूँ.....................आपको भी धन्यवाद......!!
एक बात आपसे और कहूँ....अभी मुझे भूतनाथ ही रहने दें.....इसके पीछे कोई बात है.....जो मैं बाद में सबको बता पाउँगा.....आज आखिरी बार मैं सभी ब्लॉगों पर दिखायी दूंगा.....!!कल से सिर्फ़ अपने ब्लाग एवं दो कम्युनिटी ब्लॉगों पर ही रहूंगा.....मुझसे कोई गलती हुई हो तो मैं तहे-दिल से खेद प्रकट करता हूँ....और सबसे क्षमा माँगता हूँ.....!!
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8 टिप्‍पणियां:

Fauziya Reyaz ने कहा…

aapka ye qadam achha hai, sach kahoon to har chauthe blog par aapka same post theek nahi lagta tha...

महफूज़ अली ने कहा…

chaliye hamne aapko bhotnath hi rehne diya bhai......hehehehehe.......


Namaskar......

महफूज़ अली ने कहा…

chaliye hamne aapko bhotnath hi rehne diya bhai......hehehehehe.......

महफूज़ अली ने कहा…

chaliye hamne aapko bhotnath hi rehne diya bhai......hehehehehe.......

BrijmohanShrivastava ने कहा…

हम तो यही चाहते थे कि आप भूतनाथ ही रहें मगर बीच बीच में आप अपना नाम और ब्लॉग का फोटो बदलते रहे |आज की पोस्ट पढी ,इस पर टिप्पणी क्या करुँ -इतना जरूर कहा सकता हूँ कि """एक दिन भूत के बच्चे ने भूत से कहा पापा आज मुझे एक आदमी दिखा था ,भूत ने कहा बेटा आदमी मादमी कुछ नहीं होता यह केवल तेरा भ्रम होगा | मै समझता हूँ उसने ठीक ही कहा होगा क्योंकि आदमी तो बहुत है जहाँ में ऐसा लगता है इन्सान कम है |आदमी में आदमियत न देखा कर ही भूत ने कहा होगा

अर्शिया ने कहा…

Hamen koi aapaatte nahee.
( Treasurer-S. T. )

pooja joshi ने कहा…

why bhutnaatha?

दर्पण साह "दर्शन" ने कहा…

bhootnath ji shayad huemin aur aapko ek hi samay hua hai blogging main aaiye hue...

aapke lekh hamesha se hi mujhe prabavit karte rahein hai.

...kuch tecnical karan se apne blog ko niji banaya tha...

par aapke lekhan ki kai community blogs main aahat mil hi jaati hai....

badhiya lekhan ke liye badhai...

 
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