भारत का संविधान

"हम भारतवासी,गंभीरतापूर्वक यह निश्चय करके कि भारत को सार्वभौमिक,लोकतांत्रिक गणतंत्र बनाना है तथा अपने नागरिकों के लिए------- न्याय--सामाजिक,आर्थिक,तथा राजनैतिक ; स्वतन्त्रता--विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास,आस्था,पूजा पद्दति अपनाने की; समानता--स्थिति व अवसर की व इसको सबमें बढ़ाने की; बंधुत्व--व्यक्ति की गरिमा एवं देश की एकता का आश्वासन देने वाला ; सुरक्षित करने के उद्देश्य से आज २६ नवम्बर १९४९ को संविधान-सभा में,इस संविधान को अंगीकृत ,पारित तथा स्वयम को प्रदत्त करते हैं ।"

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ओ माँ.....तेरे बारे में मैं क्या कहूँ....मैं तो तेरा बच्चा हूँ....!!

शनिवार, 9 मई 2009

ओ माँ.....तेरे बारे में मैं क्या कहूँ....मैं तो तेरा बच्चा हूँ....!!

माँ के बारे में मैं क्या कहूँ अब.........आँखे नम हो जाती हैं माँ की किसी भी बात पर........दरअसल माँ का कृत्य इतना अद्भुत होता है कि उसका पर्याय धरती पर ना कभी हुआ और ना कभी हो भी सकता है......आदमी की सीमितताओं के बीच भी माँ जिन कार्यों को अपने जीवन में अंजाम देती है....वह उसे एक अद्भुत व्यक्तित्व में परिणत कर देते हैं....माँ सृष्टि का ही एक व्यापक रूप है.... माँ प्रकृति का ही इक पर्याय है....माँ अपनी ससीमताओं के बावजूद भी एक असीम संरचना है....मगर सच तो यह है कि आप जब आप माँ के बारे में कुछ भी कहने बैठते हो तो आपके तमाम शब्द बेहद बौने लगने लगते हैं.....सृष्टि के आरम्भ से ही धरती पर विभिन्न तरह के जीवों की प्रजातियों में माँ नाम की इस संज्ञा और विशेषण ने अपनी संतान के लिए जो कुछ भी किया है... उसके सम्मुख अन्य कुछ भी तुच्छ है....और आदमी की जाति में तो माँ का योगदान अतुल्य है...........!!!सच बताऊँ.........??माँ धरती पर खुदा का ही दूसरा रूप है..........है ना........???
माँ के बारे में आप यह भी नहीं कह सकते कि उसने हमारे लिए कितना-कुछ सहा है....सच तो यह है कि हम तो यह भी नहीं जान सकते कि उसे इस "कितना-कुछ" सहने में भी कितना अनिर्वर्चनीय सुख.....कितना असीम आनंद प्राप्त होता है.....आप तनिक सोचिये प्रकृति की वह सरंचना कैसी अद्भुत चीज़ होगी.....जो अपनी संतान को पालने में आने वाली हर बाधा को अपनी सीढ़ी ही बना लेती है.....संतान के हर संकट को खुद झेल लेती है....संतान के हर दुखः में चट्टान की तरह सम्मुख खड़ी हो जाती है....और तो और इस रास्ते में आने वाले तमाम दुखः और तकलीफ भी उसके आनंद का अगाध स्रोत बन जाते हैं....जबकि आदमी की आदिम प्रवृति दुखों से पल्ला झाड़ने की होती है.....!!
दोस्तों....!! माँ की बाबत हम कुछ भी लिखें....बेहद-बेहद-बेहद कम होगा.....एक मादा,एक औरत के रूप में चाहे जैसी भी हो,माँ के रूप में तो वह अद्भुत ही साबित होती है(मैं अपवादों की बात नहीं कर रहा.....जो इस मामले में संभव हैं)............आदमी की जात को इस बात के लिए ऊपर वाले का सदा कृतज्ञ रहना चाहिए कि उसे हर घर में....हर परिवार में माँ के रूप में एक ऐसी सौगात मिली है....जिसका बदला वह जन्मों-जन्मों तक भी नहीं चुका सकता....!!
और बस इसी एक वजह से उसे समूची स्त्री जाति की अपार इज्ज़त करनी चाहिए... और जो खुन्नस उसके मन में स्त्री के प्रति किसी भी कारण से मौजूद है....तो उसे उन कारणों की ही पड़ताल करनी चाहिए....ताकि तमाम प्रेम-संबंधों और दैहिक-संसर्गों के बावजूद आदमी और औरत के बीच जो कुहासा है....वो छंट सके.....स्त्रीत्व के मूल्य स्थापित हो सकें.....आदमियत अपना गौरव पा सके....और स्त्री अपना खोया हुआ वजूद......!!
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5 टिप्‍पणियां:

अमिताभ श्रीवास्तव ने कहा…

ISHVAR har kanhi nahi jaa sakta isliye usne MAA banai he/
sach to yah he ki MAA ko naa to kisi shbdo me utara jaa sakta he naa hi kisi paribhasha me/ ba use mahsoosa jaa sakta he, uska pyaar, uski goud uski mamta .....
is duniya me hame ek baar kho dene par har chij mil sakti he kintu MAA nahi....////
aapne jitna bhi likha man karta he padhhta rahoo...//bahut khoob//
ISHVAR har kisi ko MAA ka pyaar sadev deta rahe////

vandana ने कहा…

bhoot ji .. ma ke liye kahe gaye apke is bhav poorn lekh ko padhkar koi compliment to nahi soojh raha hai... bas ishvar se itni hi dua hai ke maa ka pyaar har kisi ko milta rahe...

Pyaasa Sajal ने कहा…

jazbaati kar diya aapne vaakayi

महावीर ने कहा…

माँ की परिभाषा, गुण आदि शब्दों में तो असम्भव है, किंतु आपके लेख में माँ के प्रति
उद्गारों की अभिव्यक्ति प्रसंशनीय है। माँ की पूजा से बढ़ कर कोई पूजा नहीं है। जिन
राम, कृष्ण, बुद्ध जैसे अवतारों की मंदिरों में जाकर नतमस्तक हो पूजा करते हैं, वे
भी माँ से ही जन्में हैं। लेख की अंतिम पंक्तियां बहुत ही गहरा संदेश देर ही है। यदि
मनुष्य इस तथ्य को समझ ले तो जीवन सरस और सानंद हो जाए।
इस लेख के लिए बधाई।
महावीर शर्मा

Shikha .. ( शिखा... ) ने कहा…

I am speechless..

Bahut bhaavpuran aur sachaai se bhara lekh hai aapka..
Sada yunhi likhte rahiyega..

 
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