भारत का संविधान

"हम भारतवासी,गंभीरतापूर्वक यह निश्चय करके कि भारत को सार्वभौमिक,लोकतांत्रिक गणतंत्र बनाना है तथा अपने नागरिकों के लिए------- न्याय--सामाजिक,आर्थिक,तथा राजनैतिक ; स्वतन्त्रता--विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास,आस्था,पूजा पद्दति अपनाने की; समानता--स्थिति व अवसर की व इसको सबमें बढ़ाने की; बंधुत्व--व्यक्ति की गरिमा एवं देश की एकता का आश्वासन देने वाला ; सुरक्षित करने के उद्देश्य से आज २६ नवम्बर १९४९ को संविधान-सभा में,इस संविधान को अंगीकृत ,पारित तथा स्वयम को प्रदत्त करते हैं ।"

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अरे बिलागर बंधुओं....इक बात तो बताओ....??

शनिवार, 2 मई 2009

...........अरे बिलागर बंधुओं...........हम ढेरों दिनों से यह सोचता रहा हूँ.......कि जो लोग-वोग ब्रांडेड-वरान डेड करते रहते हैं.....इसमें तनिको सच भी है...कि झूठो-मूठो ही लोग ब्रांड नाम के पीछे हलकान रहते हैं....!!
............एक बताओ हमका बताओ तो भइया.....कि हमको तन ढकने के लिए कपड़ा....पैर को साफ़-सुथरा बनाए रखने के लिए जूता.....और जीवन की सब जरूरतों को पूरा करने के लिए कुछो--कुछो चाहिए ही होता है.... अगरचे जे कोई ब्रांड आदि का नहीं होता तो का ससुरा एकदम "ख़त्म"होता है......??
.........हम लोगन के बाप दादा जो झकास धोती-कुरता पहिन-पहिन कर जिनगी गुजार कर इहलोक सिधार गिये..... लोग आदमी नहीं थे का......??.....जो चीज़ दू पईसा में उपलब्ध होती है......उसके लिए ब्रांड नाम पर दस पईसा खर्च करके लोग बाग़ का जताते हैं....और जादे पईसा खर्च करके बार-बार किसको सुनाते हैं.....??
......अरे बंधुओं.....तुमरे बाप-ददा-परदादा-लकड़दादा-सकड़दादा-फकड़दादा......सब के सब इंहे सब जईसन-तयिसन कपड़ा-लत्ता पहिन वहिन कर समूचा जिनगी बेहतरीन ढंग से जी कर चले गए.....उसका दसो पईसा जिनगी तुम सब लोग ब्रांडेड वैगरह के झंडे पहराने वाले तुम सब लोग जी सकते हो का......????
......अरे भईया जो कुछ वो खा गए..... सब तो खाना दूर का बात......तुम सबको सब देखने को भी नसीब में नहीं है......!!......दिन-रात ब्रांडेड-ब्रांडेड करते रहते हो......बड़ी-बड़ी कंपनियों की थैलियाँ भरते रहते हो.... उनके नुमायिन्दों को उंचा वेतन देते रहते हो.....!!.......अरे भईया कभी तो सोचो कि सब है तो आख़िर है क्या...!!
......एक बात बताएं बिलागर भईया.....??"संसार में सबसे ज्यादा धन आदमी के अंहकार का पोषण करके कमाया जाता है......तमाम ब्रांडेड चीज़ों में उनके जबरदस्त दाम के अनुपात में क्वालिटी हो या ना हो.... मगर उनको इस्तेमाल करने वाले लोगों का अंहकार बेशक बहुत पुष्ट होता है.....अपने अंहकार की पूर्ति के आदमी बहुत कुछ करता है.....और ब्रांड नाम का ईजाद उसके इसी अंहकार नाम की पूर्ति के लिए कुछ बेहद ही चालाक लोगों ने किया है....और यह क्षेत्र इस कदर पहला-फूला कि कालांतर में अनेकों लोगों ने इस नटवरलालगिरी को अपना लिया ......वे लोग जल्द ही कंपनी बन गए......और फिर बहुराष्ट्रीय कंपनी.....!!और जल्द ही विश्व-व्यापार की नकेल इनके हाथ में गई......जैसा कि ये चाहती भी थीं......!!!!
...........बस एक ही बात पूछूँगा बिलागर बंधुओं आपसे.....कि जो भी चीज़ आपके हाथ में है.....अपनी उपयोगिता.....क्वालिटी....महत्त्व.....और अन्य चीज़ों के हिसाब से और उसके अनुपात से उसका मूल्य कितना वाजिब है.....??क्या यह सच नहीं हम धनवान लोग अपने अंहकार का उंचा मूल्य बनाए रखने के लिए तमाम चीज़ों का मूल्य उंचा बनाए रखने में मदगार होते हैं.....तुर्रा यह कि अमुक चीज़ ब्रांडेड है......!!
.........दोस्तों जो लोग ब्रांडेड नहीं इस्तेमाल करते.....वो आदमी नहीं होते.....??......जो लोग सीधा-साधा- सरल जीवन जीते हुए ऊँचे से ऊँचे मानक स्थापित करते हैं.....वो लोग आदमी नहीं होते......??......जो लोग चीज़ों को अपने अंहकार के सन्दर्भ में ना लेकर उसकी उपयोगिता के परिप्रेक्ष्य में जांचते हैं.....क्या वो पागल होते हैं....??
............शरीर की सुरक्षा के लिए बनाए गए आवरण को.......जीवन में काम आने वाली उपयोगी चीज़ों को हम आखिरकार किस हद तक पहुँचा देते हैं......??.........क्या सच में ही ब्रांड नाम क्वालिटी का नाम है.....या कि कुछ और.....??..........अगली बार किसी ब्रांडेड वास्तु को खरीदादते वक्त......उसे ऊपर से नीचे निहारें....और यह तौलने की कोशिश अवश्य करें कि.......उस वस्तु के मूल्य के अनुपात में आपके अंहकार का पोषण करने के आलावा उसमें ऐसा क्या है......जो सरल-सी जिन्दगी के अनुपात से कहीं बड़ा मानक है.......!!!!
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6 टिप्‍पणियां:

मुकेश कुमार तिवारी ने कहा…

भूत भाई,

माफ करियेगा मैं आपको नाथ नही कह रहा हूँ।

बात खूब कही है, आज के दौर में सफल हर व्यक्ती के पीछे जरूर कम से कम एक दो लोग वे होंगे जो अब पुरखों के नाम पर एक तस्वीर में दफन हो धूल फांक रहे होंगे इस वक्त। और वो सफल आदमी पानी भी ब्रान्डे़ड पी रहा होगा और अपने बच्चों में यह संस्कार स्थापित कर रहा होगा कि जो तुम्हारी तरह कपड़े नही पहनते, या अन्य सुविधाओं का उपभोग नही करते छोटे होते हैं और छोटे लोग ठीक नही होते इनसे जितनी बने उतनी दूरी ठीक।

बात दिल को छू गई।

मुकेश कुमार तिवारी

hem pandey ने कहा…

ब्रांडेड चीजें अपनी शाख के कारण बिक जाती हैं. जब व्यक्ति कोई ब्रांडेड आयटम खरीदता है तो यह मान कर चलता है कि इसकी गुणवत्ता श्रेष्ठ होगी. चूंकि बाजार में बेईमानी हद दर्जे की है, इस लिए भी लोग ब्रांडेड की तरफ आकर्षित होते है. महंगे ब्रांडेड आयटम केवल शेखी बघारने के लिए ही नहीं खरीदे जाते.ब्रांडेड आयटम की वारंटी भी रहती है.जागरूक और जुझारू ग्राहक खरीदने के बाद शिकायत होने पर कंपनी के खर्च पर मरम्मत या रीप्लेस भी करवा लेते हैं.

bhawna ने कहा…

dono hi bate apni apni jagah par theek hain . bas aap ka anubhav kya raha i par hi aap apne vichaar rakhte hain .aapne bahut badhiya baat likhi hai.pahli baar aapke blog par aai . padh kar achha laga .vaise mujhe bhi brand ke kide ne khaya hua hai aur maje ki baat abhi tak koi khujali nahin hui :).

महामंत्री - तस्लीम ने कहा…

बरान्‍डेड वरान्‍डेड का बढिया हाल बताया आपने।

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SBAI TSALIIM

raj ने कहा…

i think branded cheez khreedane se apko satifaction miltee hai ki achhi cheez khreedee.quilty does matter...

*KHUSHI* ने कहा…

branded cheez se ek sukun milta hai aur garv karte hai kintu jab pata chalta hai ki yehi branded ki same to same duplicate aadhe daam pe milti hai to mann mia dukh hota hai kintu jubaan pe bolte hai ki original is original.. lolzz.. sab dikhawe ki baat hai aur sab ka pana pana nazariya hai aur apni apni pasand. insaan khud ki aatma ko ek acchi brand banaye wohi kafi hai..

 
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