भारत का संविधान

"हम भारतवासी,गंभीरतापूर्वक यह निश्चय करके कि भारत को सार्वभौमिक,लोकतांत्रिक गणतंत्र बनाना है तथा अपने नागरिकों के लिए------- न्याय--सामाजिक,आर्थिक,तथा राजनैतिक ; स्वतन्त्रता--विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास,आस्था,पूजा पद्दति अपनाने की; समानता--स्थिति व अवसर की व इसको सबमें बढ़ाने की; बंधुत्व--व्यक्ति की गरिमा एवं देश की एकता का आश्वासन देने वाला ; सुरक्षित करने के उद्देश्य से आज २६ नवम्बर १९४९ को संविधान-सभा में,इस संविधान को अंगीकृत ,पारित तथा स्वयम को प्रदत्त करते हैं ।"

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अब भूत नहीं हूँ मैं.....!!इक तलाश हूँ मैं.....!!कोई आस हूँ मैं....!!इक अधूरी प्यास हूँ मैं.....तुम्हारे आस-पास हूँ मैं....अगर आदमी हो तुम....तुम्हारा रहनुमा हूँ....गर नहीं तो तुम्हारी लाश हूँ मैं....!!अब भूत नहीं हूँ मैं...राजीव थेपड़ा में छिपी हुई कोई बात हूँ मैं....!!

रविवार, 24 अक्तूबर 2010

मैं भूत...................नहीं..............बोल रहा हूँ..........!!!!
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1 टिप्पणी:

manukavya ने कहा…

अगर आदमी हो तुम....तुम्हारा रहनुमा हूँ....गर नहीं तो तुम्हारी लाश हूँ मैं...
बहुत ही चुभता हुआ सच... सुन्दर रचना

 
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