हुर्रा.....जीत गए.....वन्दे मातरम्.....भारत जिंदाबाद.......!!!
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हुर्रा.....जीत गए.....वन्दे मातरम्.....भारत जिंदाबाद.......!!!
शनिवार, 2 अप्रैल 2011
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कोई अकुलाहट है सदा मेरे भीतर,जिसे व्यक्त करने को व्यग्र रहता हूँ,मैं मुझसे मिल पाने के लिए पागल बना रहता हूँ...जीते-जी शायद न हो पाए खुद से मिलना...इसलिए भूत बना हुआ सारे जहां में आवारा फिरता हूँ....!!
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