मैं भूत...................नहीं..............बोल रहा हूँ..........!...
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रविवार, 24 अक्टूबर 2010
अब भूत नहीं हूँ मैं.....!!इक तलाश हूँ मैं.....!!कोई आस हूँ मैं....!!इक अधूरी प्यास हूँ मैं.....तुम्हारे आस-पास हूँ मैं....अगर आदमी हो तुम....तुम्हारा रहनुमा हूँ....गर नहीं तो तुम्हारी लाश हूँ मैं....!!अब भूत नहीं हूँ मैं...राजीव थेपड़ा में छिपी हुई कोई बात हूँ मैं....!!
मंगलवार, 19 अक्टूबर 2010
भारत विश्व की एक महाशक्ति बन सकता है बशर्तें......!!!

मैं भूत बोल रहा हूँ..........!!
भारत विश्व की एक महाशक्ति बन सकता है बशर्तें......!!! इन दिनों तमाम पत्र-पत्रिकाओं में लगातार ही भारत के एक महाशक्ति बनने के कयास लगाये जाते हैं,महाशक्ति बन चुके और महाशक्तिमान अमेरिका को चुनौती देते चीन से उसकी तुलना भी की जाती है,मगर भारत की इस महत्वकांक्षा में सबसे बडा रोडा भारत खुद ही है और अगर यह देश अपनी कतिपय किन्तु महत्वपूर्ण खामियों को दूर करने का प्रयास नहीं करेगा तो महाशक्ति...
मंगलवार, 12 अक्टूबर 2010
हां....गर्व से कहिए कि हम एक समाज हैं......!!
मैं भूत बोल रहा हूँ..........!!
हां....गर्व से कहिए कि हम एक समाज हैं......!!
कभी जब भी मैं अपने आस-पास के समाज पर नज़र दौडाता हूं....तो ऐसा लगता है कि यह समाज नहीं....बल्कि एक ऐसी दोष-पूर्ण व्यवस्था है,जिसमें लेशमात्र भी सामाजिकता नहीं.....उदाहरण हर एक पल हमारे सामने घटते ही रहते हैं....इस समाज में जीवन-यापन के लिए नितांत आवश्यक चीज़ है आजीविका का साधन होना....और दुर्भाग्यवश यही आजीविका...
गुरुवार, 7 अक्टूबर 2010
आदरणीय प्रधानमंत्री जी......................
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, समुचे देशवासियों की और से आपको राम-राम (साम्प्रदायिक राम-राम नहीं बाबा !!) आदरणीय पी.एम. जी,अभी कुछ दिनों पहले आपका बयान देखा था अखबारों में लाखों-लाख किलो अनाज के सडने पर अदालतों द्वारा उसे गरीबों को मुफ़्त मुहैया कराये जाने के आदेश पर,जिसे पहले आपके परम आदरणीय मंत्रियों ने सलाह बतायी और फिर अन्य गोल-मोल बातें बताने लगे,आपने भी अदालतों को सरकार के नीतिगत मामलों में नसीहत...
शनिवार, 2 अक्टूबर 2010
विभिन्न धर्मों के लोगों में से एक इंसान की आवाज़....!!
मैं भूत बोल रहा हूँ..........!!
पिछले दो दिनों से सोच रहा हूँ कि इस विषय पर लिखूं कि ना लिखूं....ऐसा यह विषय,जो शोध का है,पुरातत्व का है,इतिहास का है,वर्तमान का है,भविष्य का है,आस्था का है,कर्तव्य का है,दायित्व का है,भाईचारे का है,बड़प्पन का है,सौहार्द का है,धर्म का है,देश की शान्ति का है,आपस में मिलकर रहने का है....और हम चाहें तो यह अब न भूतो ना भविष्यति वाली मिसाल का भी हो सकता है...मगर अहम भला ऐसा क्यूँ होने देंगे...!!पांच-सौ साल से लटके हुए...
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